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दुर्ग

ई-समंस की शत प्रतिशत तामिली के संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जिला दुर्ग द्वारा पुलिस नियंत्रण कक्ष में कार्यशाला का आयोजन किया गया

दुर्ग। जिले में ई-समंस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन और समंस-वारंट की तामिली प्रक्रिया को 100 प्रतिशत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल (भापुसे) के निर्देश पर पुलिस नियंत्रण कक्ष, भिलाई में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में जिले के सभी थाना-चौकी के समंस वारंट मददगार आरक्षकों ने सहभागिता की। प्रोजेक्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से आरक्षकों को ई-समंस तामिली प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। समंस वारंट मददगार, CCTNS ऑपरेटर और कोर्ट मोहर्रिर आरक्षकों को आपस में समन्वय स्थापित कर समय पर ई-समंस की तामिली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

615 ई-समंस की तामिली पूरी, 100 प्रतिशत अनुपालन का लक्ष्य

अब तक जिले में कुल 1046 ई-समंस जारी हो चुके हैं, जिनमें से 615 समंस की तामिली की जा चुकी है। शेष समंसों की शीघ्र तामिली कर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ई-समंस की तामिली और अदम तामिली (Non-Service) की जानकारी हर हाल में समय पर पोर्टल में अपडेट की जानी चाहिए।

ऑनलाइन तामिली प्रक्रिया को बनाया जा रहा सहज

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने कार्यशाला के दौरान ई-समंस एप के संचालन की बारीकियों को समझाते हुए कहा कि यह भारत सरकार की क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को डिजिटल रूप में एकीकृत करने की महत्वाकांक्षी योजना है। समंस वारंट अब सीधे न्यायालय से थाना स्तर पर ऑनलाइन प्राप्त हो रहे हैं। थाना स्तर पर उसका प्रिंट आउट निकाल कर संबंधित व्यक्ति के पास जाकर तामिली की जा रही है। मौके पर ही समंस प्राप्तकर्ता की फोटो लेकर ई-समंस एप में अपलोड कर उसे कोर्ट के CIS पोर्टल में तामील दिखाना शुरू कर दिया गया है।

तामिली में आ रही समस्याओं का त्वरित निराकरण

कार्यशाला में ई-समंस की तामिली प्रक्रिया में आ रही कठिनाइयों और तकनीकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि वे ई-समंस एप को अपडेट रखें और तामिली के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनाएं।

सभी की सामूहिक जिम्मेदारी – एसएसपी

एसएसपी ने स्पष्ट किया कि ई-समंस तामिली के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करना सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह डिजिटल प्रक्रिया न्यायालयीन कार्यवाही में पारदर्शिता और दक्षता लाने में मील का पत्थर साबित होगी।

कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अभिषेक झा, समस्त थाना-चौकी प्रभारी और समंस वारंट आरक्षक मौजूद रहे।

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